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चंपारण मीट से स्वागत:क्या सचमुच में राहुल गांधी को दूल्हा बनाना चाहतें हैं लालू यादव ?

सुप्रीम कोर्ट से राहत के बाद लोकसभा की सदस्यता बहाल होने से देशभर के कांग्रेसी उत्साहित


patna:- सुप्रीम कोर्ट से मिली राहतके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी की लोकसभा की सदस्यता बहाल कर दी गई है..इसके बाद देशभर के कांग्रेसी नेता जश्न मना रहें हैं ..वहीं बीजेपी भी अंदर से खुश आ रही है कि उसे लोकसभा चुनाव में मोदी बनाम राहुल गांधी का एजेंडा सेट करने में सुविधा होगी..वहीं अब फिर से लालू यादव के उस बयान की चर्चा होने लगी है जिसमें उन्हौने राहुल गांधी से दूल्हा बनने का आग्रह किया था.
लालू परिवार है उत्साहित

दरअसल राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने और लोकसभा की सदस्यता बहाल होने से यूं तो I.N.D.I.A गठबंधन से जुड़े सभी पार्टी के नेता स्वागत कर रहें हैं,पर सबसे ज्यादा खुश लालू प्रसाद एंड फैमिली में देखने को मिल रही है,क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरनेम मानहानि केस में ट्रायल कोर्ट द्वारा राहुल गांधी को अधिकतम 2 साल की सजा देने और फिर गुजरात हाईकोर्ट के रूख पर जिस तरह की टिपप्णी की है..उससे बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को गुजरातियों को लेकर दिे एगए बयान में मामले में कोर्ट में चल रही सुनवाई में राहत की उम्मीद दिखने लगी है..क्योंकि इस मामले में ट्रायल कोर्ट सुप्रीम कोर्ट की टिप्प्णी का ख्याल जरूर रखेगी.
चंपारण मीट से स्वागत
लालू परिवार की खुशी का अंदाजा इस बातसे लगाया जा सकता है कि राहुल गांधी को लालू यादव ने अपनी बेटी मीसा भारती के दिल्ली स्थित आवास पर आमंत्रित किया और बिहार की पसिद्ध चंपारण मीट का भोजन कराकर स्वागत किया.इस दौरान मोदी सरकार के खिलाफ बनाए गए गठबंधन I.N.D.I.A के आगे की रणनीति पर भी चर्चा हुई.इस दौरान लालू यादव के साथ ही तेजस्वी यादव और आरजेडी के कई बड़े नेता मौजदू थे.

दूल्हा की चर्चा

इस आवाभगत के बाद लालू यादव का विपक्षी दलों के पटना में राहुल गांधी को लेकर दिेए गए बयान की चर्चा फिर से होने लगी है जिसमें लालू यादव ने राहुल गांधी से दूल्हा बनने का आग्रह किया था.उस समय लालू यादव के बयान को शादी वाले दूल्हा से जोड़कर देखा गया था और इसको लेकर उनके बयान की आलोचना भी हुई थी,पर अब उस दूल्हे का सेंस 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों का दूल्हा बनने से जोड़ कर देखा जा रहा है.अगर ऐसा होता है तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए बड़ा झटका माना जा सकता है,क्योंकि नीतीश कुमार ने बीजेपी का साथ छोड़कर बिहार में महागठबंधन के साथ सरकार बनाते हुए केन्द्र की मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय नेता बनने की मुहिम शुरू की थी.उन्हौने सार्वजनिक रूप से खुद को पीएम पद के रेस से भले ही बताया था पर उनके समर्थक और जेडीयू नेता अक्सर विभिन्न मंचों से नीतीश कुमार के पीएम कैंडिडेट होने की बात कहतें हैं,पर ऐसा लगता है कि राहुल गांधी के ज्यादा एक्टिव होने से वे I.N.D.I.A गठबंधन के दूल्हा बनने की ओर अग्रसर हैं..

 

I.N.D.I.A के संयोजक बनने पर सस्पेंस

 

बताते चलें कि पटना में विपक्षी दलों की मीटिंग की मेजबानी नीतीश कुमार ने की थी..वहीं बैंगलुरू में हुए विपक्षी दलों की बैठक की मेजबानी कांग्रेस ने की और राहुल गांधी द्वारा सुझाए गए I.N.D.I.A नाम को स्वीकर कर लिया गया.सूत्रों के अनुसार नीतीश कुमार इस नाम पर सहमत नहीं थे,पर अधिकांश दलों ने सहमति जताई जिसके बाद गठबंधन का नाम I.N.D.I.A रखा गया और नीतीश कुमार को बेमन से इसके स्वीकार करना पड़ा.वहीं नीतीश कुमार को संयोजक बनाने के मुद्दे पर सभी दल एकमत नहीं हो पाए.जिसकी वजह से इस मुद्दे के अब मुंबई बैठक के लिए छोड़ दिया है.मुंबई में बैठक की मेजबानी उद्धव ठाकरे और शरद पवार को करना है ..अब देखना है कि वहां संयोजक को लेकर क्या फैसला होता है.अगर इस बैठक में नीतीश कुमार को संयोजक नहीं चुनाव जाता है तो मानकर चलना चाहिए कि मीटिंग के बहाने नीतीश कमार के साथ बड़ा खेल हो रहा है.

नीतीश के मुकाबले लालू के करीब है गांधी परिवार

इस बीच नीतीश कुमार मुंबई बैठक कोलेकर ज्यादा बयान नहीं दे रहे हैं बल्कि संयोजक एवं गठबंधन के नाम को लेकर वे सिर्फ सफाई दे रहें हैं,वहीं लालू प्रसाद यादव अब इस गठबंधन का लेकर लगातार बयान दे रहे हैं.उन्हौने मुंबई बैठक के एजेंडा पर भी चर्चा की है और कहा कि बीजेपी के NDA गठबंधन के खिलाफ I.N.D.I.A के प्रत्याशियों के मुद्दे पर रणनीति बनेगी..यानी लालू यादव नीतीश से ज्यादा एक्टिव नजर आ रहें हैं.वहीं गांधी परिवार और कांग्रेस के लिए लालू यादव नीतीश के मुकाबले ज्यादा विश्वसनीय नजर आतें हैं ,क्योंकि लालू प्रसाद यादव ने बुरे दौर मे गांधी परिवार का साथ दिया था,जब शरद रवार जैसे नेता ने सोनियां गांधी कि विदेशी मूल का मुद्दा उठाया था तो लालू यादव ने उसे भारतकी बहू कहकर बचाव किया था.इसके मुकाबले नीतीश कुमार की राजनीति ज्यादातर बीजेपी के साथ ही गुजरी है.वे बीजेपी के साथ मिलकर आरजेडी-कांग्रेस की सरकार के खिलाफ मैदान में उतरे और बिहार के सीएम तक पहुंचे..वहीं 2015 में महागठबंधन के साथ चुनाव जीतने के बाद 2017 में बीजेपी के साथ चले गए थे.
इसलिए चर्चा हो रही है कि राहुल गांधी और लालू प्रसाद यादव I.N.D.I.A में रहते हुए भी अलग से खिचड़ी पकाने की कोशिश कर रहें हैं,क्योंकि काफी प्रयास के बाद भी नीतीश कुमार तेजस्वी यादव को सीएम की कुर्सी देते नजर नहीं आ रहें हैं..ऐसे में लालू प्रसाद यादव भी अंदर से नीतीश से खुश नहीं हैं .पर सत्ता में बने रहने के लिए बिहार में नीतीश के साथ सरकार चला रहें हैं.ऐसे में देखना है कि नीतीश के साथ विपक्षी एकता की शुरूआत करनेवाले लालू यादव क्या सचमुच में राहुल गांधी को दूल्हा बनाने की चाल रहे हैं…

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